खाना काश्त की जमीन क्या होती है?

हरियाणा की जमाबंदी के संदर्भ में “खाना काश्त (Khana Kasht)” को समझने का सबसे आसान तरीका है—यह मालिकाना हक का कॉलम नहीं, बल्कि खेती/कब्जे से संबंधित रिकॉर्ड का कॉलम है। हाल के 2026 के हरियाणा राजस्व निर्देशों ने इस अंतर को और स्पष्ट किया है। (Indian Kanoon)

जमाबंदी में सामान्यतः दो महत्वपूर्ण बातें अलग-अलग दर्ज होती हैं:

  • खाना मलकियत / Column 4 → किसका मालिकाना हक है।
  • खाना काश्त / Column 5 → जमीन पर कौन खेती/कब्जे में है या काश्त कर रहा है।

इसलिए अगर किसी व्यक्ति का नाम केवल खाना काश्त में है और मलकियत वाले कॉलम में नहीं है, तो केवल उस एंट्री से उसे मालिक मान लेना सुरक्षित नहीं है। (Indian Kanoon)

2. फिर लोग कहते क्यों हैं कि “खाना काश्त में मालिक नहीं होता”?

एक उदाहरण से समझिए:

मान लीजिए—

Column 4 – मलकियत:
राम — 1/2 हिस्सा
श्याम — 1/2 हिस्सा

Column 5 – खाना काश्त:
मोहन

इसका सीधा अर्थ यह नहीं होगा कि मोहन मालिक है। रिकॉर्ड में मोहन का नाम खेती/कब्जे वाले कॉलम में है, जबकि मालिकाना हक राम और श्याम के नाम दर्ज है।

इसीलिए खाना काश्त में नाम होना और मालिक होना दो अलग बातें हैं।

3. लेकिन एक महत्वपूर्ण बात

हर खाना काश्त का मामला एक जैसा नहीं होता।

कई पुराने मामलों में किसी व्यक्ति ने जमीन खरीदी होती है, लेकिन उसका नाम मालिकाना कॉलम में अपडेट नहीं हुआ और केवल खाना काश्त में चला गया। ऐसे मामलों में व्यक्ति के पास बिक्री विलेख आदि के आधार पर अधिकार हो सकते हैं, लेकिन जमाबंदी में ownership entry ठीक न होने के कारण रिकॉर्ड में समस्या पैदा होती है। 2026 के हरियाणा निर्देशों में ऐसे मामलों को सुधारकर खरीदार को उसके विक्रेता के हिस्से के अनुसार मलकियत कॉलम में co-sharer के रूप में दर्ज करने की व्यवस्था बताई गई है। (Indian Kanoon)

4. इसे बेचने में समस्या क्यों आती है?

यही सबसे महत्वपूर्ण बात है।

अगर व्यक्ति कहता है:

“मैं खाना काश्त में दर्ज हूँ, इसलिए मैं मालिक हूँ और अपनी जमीन बेच रहा हूँ।”

लेकिन मलकियत कॉलम में उसका नाम/हिस्सा नहीं है, तो Sub-Registrar/Revenue record में यह सवाल उठता है कि विक्रेता के पास वास्तव में कितना मालिकाना हिस्सा है?

2026 के निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल खाना काश्त की entry के आधार पर document प्रस्तुत करने की स्थिति में पहले record को ठीक किया जाना चाहिए; भविष्य के transactions को केवल खाना काश्त में दर्ज करने के बजाय ownership column में दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। (Indian Kanoon)

इस वजह से practical problems हो सकती हैं:

  • Registry रुक सकती है।
  • पहले ownership/mutation correction कराना पड़ सकता है।
  • वास्तविक मालिक का हिस्सा verify करना पड़ता है।
  • एक ही जमीन के अलग-अलग लोगों को sale होने का विवाद पैदा हो सकता है।
  • Buyer को title verification में समस्या आ सकती है।

2026 में ऐसे मामलों के कारण ही हरियाणा में विशेष revision/correction की प्रक्रिया शुरू की गई है। (Indian Kanoon)

5. एक बहुत जरूरी अंतर

खाना काश्त = हमेशा “बेकार या सरकारी जमीन” नहीं है।

यह कहना गलत होगा कि खाना काश्त में दर्ज हर जमीन किसी और की जमीन है या उसे कभी बेचा ही नहीं जा सकता।

असल सवाल यह है कि:

खाना काश्त में नाम किस आधार पर आया है?

जैसे:

  1. पुराना मालिक खेती कर रहा है।
  2. किसी ने जमीन खरीदी लेकिन mutation/record update नहीं हुआ।
  3. सह-स्वामी ने अपना हिस्सा बेचा।
  4. कब्जे/काश्त की पुरानी revenue entry है।
  5. किसी विशेष tenancy/कब्जे की स्थिति है।

हर स्थिति में कानूनी परिणाम अलग हो सकता है।

6. आज 2026 में खास बात

हरियाणा में अब केवल खाना काश्त में नाम दर्ज करके आगे sale transaction करने की पुरानी practice पर रोक लगाने की दिशा में स्पष्ट आदेश आए हैं। खरीदार/हस्तांतरित व्यक्ति का अधिकार, जहां कानूनन बनता है, ownership column में correction mutation के माध्यम से दर्ज किया जाना है। (Indian Kanoon)

इसलिए अगर आप किसी खाना काश्त वाली जमीन को खरीदने या बेचने का काम कर रहे हैं, तो केवल Column 5 देखकर फैसला बिल्कुल न करें।

“खाना काश्त की जमीन खरीदने से पहले चीजें कौन-कौन सी check करनी चाहिए—मलकियत, इंतकाल, किला नंबर, हिस्सा, कब्जा, रजिस्ट्री और partition सहित।”

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